महाविद्यालय परिचय

आधिकारिक विवरणिका — संक्षिप्त इतिहासगौरीशंकरपुरम् (करनई), बलिया

गौरीशंकर राय कन्या महाविद्यालय

“किसी भी समाज के सुसभ्य, सुसंस्कृत तथा प्रगतिशील होने की सर्वोत्तम कसौटी यह है कि वहाँ की महिलायें कितनी शिक्षित, सहज तथा स्वतंत्र हैं।”

— युग-पुरुष श्रद्धेय श्री गौरीशंकर राय जी

लोकप्रिय सांसद, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, आचार्य नरेन्द्र देव तथा लोकनायक जय प्रकाश नारायण के समाजवादी धारा के अमिट हस्ताक्षर, युग-पुरुष श्रद्धेय श्री गौरीशंकर राय जी के बहुआयामी व्यक्तित्व में जहाँ एक तरफ समाज के दलित, शोषित, पीड़ित एवं वंचित समुदाय के हक एवं अधिकार के लिए प्रखर, त्वरित एवं संवेदित संघर्ष दिखाई देता है, वहीं दूसरी तरफ इस समुदाय को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए सजग तथा शुचितापूर्ण सृजनात्मक पक्ष भी साफ झलकता है।

वंचित वर्ग में महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में राय साहब का चिंतन-मंथन, पूर्ण संवेदना के साथ निरन्तर चलता रहता था। उनका स्पष्ट मानना था कि देश व समाज के सर्वांगीण विकास के लिए कन्याओं को न केवल शिक्षित करना वरन् आधुनिक परिवेश में उन्हें ज्ञान-विज्ञान की समुचित शिक्षा से अलंकृत करना समाज की महती आवश्यकता है।

श्रद्धेय श्री गौरीशंकर राय जी के सपने तथा सृजनात्मक विचार को मूर्त रूप देते हुए, उनकी स्मृति में 10 मई 1999 को प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की वर्षगांठ के अवसर पर उनके पैतृक गाँव करनई (वर्तमान में गौरीशंकर पुरम्) जनपद-बलिया, (उ०प्र०) में गौरीशंकर राय कन्या महाविद्यालय की नींव रखी गई।

श्रद्धेय श्री गौरीशंकर राय जी के मित्रों, परिजनों, राज्य सरकार एवं जनप्रतिनिधियों की सहायता से यह महाविद्यालय उत्तरोत्तर विकास पथ पर अग्रसर है तथा कन्या शिक्षा के क्षेत्र में अपने लक्षित सोपानों को पूरी संवेदना, शुचिता तथा सजगता से अर्जित करते हुए नित नये कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। अपनी मेहनत और अनुशासन के बल पर विश्वविद्यालय स्तर के अग्रणी महाविद्यालयों में शुमार यह महाविद्यालय, गुणवत्तापूर्ण, मूल्यपरक और तकनीकी शिक्षा के सृजन एवं संवर्धन हेतु प्रतिबद्ध जनपद का एकमात्र महिला शैक्षिक संस्थान है।

सम्बद्धता एवं विकास यात्रा

1999

महाविद्यालय स्थापना एवं शिलान्यास

गौरीशंकरपुरम् (करनई), बलिया

10 मई 1999 को प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की वर्षगांठ के अवसर पर श्रद्धेय श्री गौरीशंकर राय जी के पैतृक गाँव में संस्था की ऐतिहासिक नींव रखी गई।

2001

स्नातक कक्षाओं का शुभारंभ (कला एवं विज्ञान)

वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर

उत्तर प्रदेश के महामहिम राज्यपाल/कुलाधिपति एवं पूर्वांचल विश्वविद्यालय की अनुशंसा के उपरांत कला एवं विज्ञान संकाय में शिक्षण कार्य प्रारंभ।

2010

विश्वविद्यालय सम्बद्धता विस्तार

महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ (MGKVP), वाराणसी

उच्च एवं गुणात्मक शैक्षिक निष्पादन के आधार पर एमजीकेवीपी से सम्बद्ध होकर संस्था ने अग्रणी पंक्ति में अपनी पहचान सुदृढ़ की।

2017

वर्तमान विश्वविद्यालय सम्बद्धता

जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय (JNCU), बलिया

गृह जनपद के राज्य विश्वविद्यालय से सम्बद्ध होकर सुदूरवर्ती, पिछड़े एवं ग्रामीण अंचल की कन्याओं को मुख्यधारा से जोड़ने का अभियान जारी।

2018

शिक्षक प्रशिक्षण संकाय (D.El.Ed.)

जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET), बलिया

प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षण हेतु डी०एल०एड० (बीटीसी) पाठ्यक्रम का विधिवत संचालन प्रारंभ।